अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ुरआन का ध्यान रखने और पाबंदी से उसकी तिलावत करने का आदेश दिया है, ताकि इन्सान उसे याद करने के बाद भूल न जाए। फिर इस बात में ज़ोर देने के लिए क़सम खाकर बताया कि क़ुरआन ऊँट के बंधन तोड़कर भागने से भी अधिक तेज़ी से इन्सान के सीने से निकल भागता है। इन्सान उसका ख़याल रखे तो वह रहता है और ध्यान न दे, तो भाग खड़ा होता है।