अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि नर्मी और बात तथा कार्य में संयम रखना चीज़ों की सुंदर तथा संपूर्णता में वृद्धि कर देती है और इससे इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि इन्सान की ज़रूरत पूरी हो जाए। जबकि नर्मी का न होना चीज़ों को दोषपूर्ण तथा कुरूप बना देती है और इन्सान की ज़रूरत की पूर्ति के मार्ग में रुकावट खड़ी कर देती है। ज़रूरत पूरी हो भी जाए, तो कठिनाई के साथ पूरी होती है।