अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि हमारे शासक ऐसे लोग बन जाएँगे, जिनके कुछ काम शरीयत के अनुसार होने के कारण हमको सही लगेंगे और कुछ शरीयत विरोधी होने के कारण हमकों ग़लत लगेंगे। ऐसे में जो उनके ग़लत कामों को अपने दिल से बुरा जानेगा और इस स्थिति में नहीं होगा कि उनका खंडन कर सके, तो वह गुनाह एवं मुनाफ़िकत से बरी माने जाएगा। इसी तरह जिसके पास हाथ से रोकने या ज़बान से खंडन करने की शक्ति होगी और वह इस शक्ति का उपयोग करेगा, वह गुनाह तथा उसमें शरीक होने से सुरक्षित रहेगा। इसके विपरीत जो उनके इन बुरे कामों को अच्छा जानेगा और उनके पद्चिह्नों पर चलेगा, वह उनकी ही तरह विनाश का शिकार हो जाएगा। फिर सहाबा ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा किया क्या हम इस तरह के शासकों से युद्ध न करें, तो आपने उनको इससे मना किया और फ़रमाया कि नहीं, ऐसा उस समय तक न करना, जब तक वे नमाज़ क़ायम करते रहें।