देहात का रहने वाला एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया, ताकि आप उसे जन्नत में दाख़िल करने वाला कोई अमल बता दें। अतः आपने उसे बताया कि जन्नत में प्रवेश और जहन्नम से मुक्ति इस्लाम के स्तंभों के अनुपालन पर निर्भर है, जो इस प्रकार हैं : एक अल्लाह की इबादत करना और किसी को उसका साझी न बनाना। पाँच वक़्त की नमाज़ क़ायम करना, जिन्हें अल्लाह ने रात और दिन में अपने बंदों पर फ़र्ज़ किया है। धन की ज़कात, जो अनिवार्य है, निकाल कर हक़दारों को देना। रमज़ान महीने के रोज़े समय पर पाबंदी से रखना। इतना सुनने के बाद उस व्यक्ति ने कहा : उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, मैं आपसे सुने हुए अनिवार्य कार्यों से न ज़्यादा करूँगा, न कम। अतः जब वह व्यक्ति जाने लगा, तो अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : जिसे कोई जन्नती इन्सान देखना हो, वह इस देहाती व्यक्ति को देख ले।