अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सहाबा को बताया कि आने वाले कल मुसलमानों को ख़ैबर के यहूदियों पर विजय प्राप्त होगी। विजय एक ऐसे व्यक्ति के हाथों प्राप्त होगी, जिसे आप झंडा थमाएँगे। यहाँ आए हुए अरबी शब्द "अर-रायह" से मुराद वह झंडा है, जिसका उपयोग सेना प्रतीक के तौर पर करती है। झंडा प्राप्त करने वाले व्यक्ति की विशेषताएँ बताते हुए आपने फ़रमाया कि वह अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से मुहब्बत रखता है, और अल्लाह तथा उसका रसूल उससे मुहब्बत रखते हैं। तब सहाबा ने रात इस बात पर सोचते हुए गुज़ारी कि सुबह झंडा किसे मिलेगा? हर व्यक्ति चाहता था कि यह गौरव उसे प्राप्त हो। सुबह हुई तो सब लोग अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपने-अपने मन में यह लालसा लिए हुए पहुँचे कि यह सम्मान प्राप्त हो जाए। लेकिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अली बिन अबू तालिब के बारे में पूछ डाला। बताया गया कि वह बीमार हैं और उनकी आँखों में परेशानी है। आपने उनको बुला भेजा। वह लाए गए, तो उनकी आँखों पर अपने मुँह की राल लगा दी, तथा उनके लिए दुआ कर दी। फिर ऐसे ठीक हो गए, जैसे कोई परेशानी थी ही नहीं। अब उनको झंडा दे दिया और आदेश दिया कि आराम से चलते जाएँ। जब दुश्मन के क़िले के निकट पहुँच जाएँ, तो उनके सामने इस्लाम ग्रहण कर लेने का प्रस्ताव रखें। अगर ग्रहण कर लेते हैं, तो इस्लाम के अनिवार्य कार्य सिखाएँ। उसके बाद अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहु को अल्लाह की ओर बुलाने की महत्ता समझाई और बताया कि किसी के द्वारा एक व्यक्ति भी सच्चे मार्ग पर चलने वाला बन जाए, तो लाल ऊँटों से बेहतर है, जिनका मालिक बनने के बाद इन्सान चाहे तो उन्हें अपने पास रखे और चाहे तो सदक़ा कर दे। यहाँ यह याद रहे कि अरबों के यहाँ लाल ऊँटों का शुमार मूल्यवान धनों में होता है।