अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब नमाज़ पूरी कर लेते, तो यह दुआ पढ़ते : "ऐ अल्लाह! मैं तुझसे क्षमा माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे क्षमा माँगता हूँ।" उसके बाद अपने रब की महानता बयान करते हुए कहते : "ऐ अल्लाह! तू शांति का स्रोत है। तेरी ही ओर से शांति प्राप्त होती है। तू बरकत वाला, प्रताप एवं सम्मान वाला है।" अल्लाह अपने तमाम गुणों में संपन्न और हर कमी से पाक है। अल्लाह ही से दुनिया तथा आख़िरत की बुराइयों से सुरक्षा माँगी जाएगी, किसी और से नहीं। दोनों जहानों में अल्लाह की भलाइयआँ बहुत ज़्यादा हैं। वह बड़ी महानता और उपकार वाला है।