अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जो व्यक्ति कोई नमाज़ को अदा करना भूल जाए और उसका समय निकल जाए, तो उसे याद आते ही तुरंत उसकी कज़ा कर लेनी चाहिए। नमाज़ को ससमय न पढ़ने के गुनाह को मिटाने का तरीक़ा इसके अतिरिक्त कुछ और नहीं है कि उसे याद आते ही पढ़ लिया जाए। उच्च एवं महान अल्लाह ने क़ुरआन पाक में कहा है : "तथा मेरी याद के लिए नमाज़ स्थापित कर।" [सूरा ताहा : 14] अर्थात भूली हुई नमाज़ को उस समय पढ़ लो, जब याद आ जाए।