मदीने के किसी रास्ते में अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) की भेंट अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से हो गई। इत्तेफ़ाक से उस समय वह जनाबत की अवस्था में थे। चूँकि उनके दिल में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का बड़ा सम्मान था, इसलिए इस अवस्था में आपके पास बैठने एवं आपसे बात करने को, उनका दिल गवारा न किया। अतः, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बताए बिना चुपके से निकल लिए और स्नान कर आए। जब आए, तो आपने पूछा कि कहाँ गए थे? उन्होंने सब कुछ बताया और कहा कि नापाकी की अवस्था में आपके पास बैठना गवारा न हुआ। चूँकि अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) जुंबी को नापाक समझते थे, इसलिए आपने उन पर आश्चर्य प्रकट किया और उन्हें बताया कि मोमिन किसी भी हाल में अपवित्र नहीं होता।