अल्ला के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तायफ़ एवं मक्का के बीच में स्थित एक वादी हुनैन की ओर निकले। आपके साथ कुछ सहाबा ऐसे भी थे, जो अभी-अभी मुसलमान हुए थे। जब वह ज़ात-ए-अनवात ,अर्थात; लटकाने का थान, नामी एक पेड़ के पास से गुज़रे, जिसका बहुदेववादी सम्मान किया करते थे और बरकत पाने के लिए उसपर अपना हथियार आदि लटकाया करते थे, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहने लगे कि उनके लिए भी इसी प्रकार का एक पेड़ निर्धारित कर दें, जिसमें वह अपने हथियार बरकत पाने के लिए लटका सकें। दरअसल वह समझते थे कि ऐसा करना जायज़ है। चुनांचे अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनके इस अनुरोध के प्रति अपनी अप्रियता व्यक्त करते हुए और अल्लाह की महानता बयान करते हुए सुबहानल्लाह कहा और फ़रमाया कि उनकी यह बात मूसा अल्लाह की जाति के इस कथन के जैसी है : {हमारे लिए भी एक पूज्य बना दीजिए, जिस तरह उन (बहुदेववादियों) के पूज्य हैं}। जब उन्होंने कुछ लोगों को बुतों की पूजा करते हुए देखा था, तो इस बात का मुतालबा किया था कि मुश्रिकों की तरह उनके भी कुछ बुत हों। आपने बताया कि आपके सहाबा का यह मुतालबा भी दरअसल उनका अनुसरण है। फिर आपने बताया कि यह उम्मत भी यहूदियों एवं ईसाइयों के पद्चिह्नों पर चलेगी और उनके जैसे काम करेगी। आपका उद्देश्य इस प्रकार के कामों से सावधान करना था।