अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का तरीक़ा यह था कि जब सोने के लिए बिस्तर पर जाते, तो दोनों हथेलियों को जमा करते, उनको उठाते (जैसा दुआ करने वाला करता है), उनमें अपने मुँह से मामूली थूक के साथ फूँक मारते और तीन सूरतें; "क़ुल हु-वल्लाहु अहद", "क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़" और "क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिन नास" पढ़ते, फिर जहाँ तक हो पाता, अपनी दोनों हथेलियों को पूरे शरीर पर फेरते। इसका आरंभ अपने सर, चेहरे और अपने शरीर के अगले भाग से करते। इस अमल को तीन बार दोहराते।