अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ऐसी सारगर्भित दुआएँ पसंद करते थे, जो दुनिया एवं आख़िरत की भलाइयों पर सम्मिलित हों, कम शब्दों में अधिक अर्थों को समेटे हुए हों तथा उनके अंदर अल्लाह की प्रेशंसा और सही उद्देश्य निहित हों। जिन दुआओं के अंदर ये विशेषताएँ न हों, उनसे आप गुरेज़ करते थे।