अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दुआ के दौरान दोनों हाथों को उठाने की प्रेरणा दे रहे हैं और बता रहे हैं कि अल्लाह अत्यधिक हया वाला है। वह देने से गुरेज़ नहीं करता। वह बंदे का दामन ख़ुशियों से भर देता है और उसे हानियों से बचाता है। वह दाता है और बिन माँगे भी देता है, तो भला माँगने के बाद कैसे नहीं देगा? उसे इस बात से हया आती है कि जब कोई मोमिन बंदा उससे कुछ माँगने के लिए हाथ उठाए, तो उसके हाथों को खाली व नामुराद वापस कर दे।