अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि समाज में रहने वाले हर मुसलमान की कुछ ज़िम्मेवारियाँ हैं, जो उसे उठानी ही होंगी। अतः इमाम और अमीर अपने मातहत लोगों का ज़िम्मेवार है। उसका काम उनके दीन व शरीयत की सुरक्षा करना, अत्याचारियों से उनकी रक्षा करना, उनके दुश्मनों से जिहाद करना और उनके अधिकारों को नष्ट होने से बचाना है। हर व्यक्ति अपने परिवार के लोगों पर खर्च करने, उनके साथ अच्छे व्यवहार करने, उनको शिक्षा देने एवं शिष्टाचार सिखाने का ज़िम्मेवार है। एक औरत के कंधों पर यह ज़िम्मेवारी है कि अपने पति के घर को अच्छे से संभाले और बच्चों की उत्तम प्रशिक्षण का प्रबंध करे। और उससे इस ज़िम्मेवारी के बारे में पूछा जोएगा, सेवक एवं मज़दूर की ज़िम्मेवारी है कि अपने पास मौजूद अपने मालिक के धन की हिफ़ाज़त करे और उसकी सेवा करे। और उससे इस ज़िम्मेवारी के बारे में पूछा जोएगा, इस प्रकार, हर व्यक्ति अपने मातहत मौजूद लोगों एवं चीज़ों का ज़िम्मेवार है, और उससे उनके बारे में पूछा जाएगा।