फ़ातिमा बिंत हुबैश रज़ियल्लाहु अनहा ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि उनका रक्त बंद नहीं होता और माहवारी के अतिरिक्त अन्य दिनों में भी रक्त जारी रहता है, तो क्या यह रक्त माहवारी का रक्त माना जाएगा और वह नमाज़ छोड़ सकती हैं? अतः अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे कहा कि यह माहवारी का नहीं, बल्कि इस्तिहाज़ा का रक्त है। बीमारी का यह रक्त गर्भाशय की नस फट जाने के कारण निकलता है। अतः जब माहवारी के वह दिन आएँ, जिन दिनों में इस्तिहाज़ा की शिकार होने से पहले तुमको नियमित रूप से माहवारी आया करती थी, तो नमाज़ एवं रोज़ा आदि वह चीज़ें छोड़ दो, जो माहवारी के दिनों में मना हैं। फिर जब माहवारी की अवधि के बराबर समय बीत जाए, तो तुम माहवारी से पाक हो गई। इसलिए रक्त के स्थान को धो डालो और माहवारी से पाकी का स्नान संपूर्ण तरीक़े से कर लो और फिर नमाज़ पढ़ो।