अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु को लोगों को शिक्षा देने और (इस्लाम की ओर) बुलाने के लिए यमन भेजा था। भेजते समय उन्हें जो आदेश दिए, उनमें से एक यह था कि वह मुसलमानों से उनकी गायों की ज़कात इस तरह वसूल करें कि हर तीस गायों पर एक साल का एक बछड़ा या बछिया (तबीअ या तबीआ) लें, और हर चालीस गायों पर दो साल की एक गाय (मुसिन्ना) लें। इसी तरह वह अहले किताब यानी यहूदियों और ईसाइयों, के हर बालिग़ पुरुष से एक दीनार जिज़्या लें, या उसके बराबर यमन के 'मआफ़िरी' नामक कपड़े लें।