अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने बताया है कि मानव से उसका विवेक छीन लेने वाली हर चीज़ अरबी भाषा के शब्द "ख़म्र" के दायरे में आएगी, और नशा लाने वाली चीज़ शुमार होगी। चाहे उसे पिया जाए, खाया जाए, सूँघा जाए या किसी और तरह से उपयोग में लाया जाए। साथ ही यह कि नशा लाने वाली और मानव विवेक का हरण करने वाली हर चीज़ को अल्लाह ने हराम क़रार दिया है, और उसके इस्तेमाल से मना किया है। कम हो या ज़्यादा। जिसने किसी नशा लाने वाली चीज़ का पाबंदी से उपयोग किया और उससे तौबा किए बिना दुनिया से चला गया, वह अल्लाह की ओर से तयशुदा इस दंड का हक़दार बन गया कि उसे जन्नत की शराब से वंचित रखा जाएगा।