एक यहूदी अमीरुल मोमिनीन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के पास आया और उनसे कहा : तुम्हारी किताब क़ुरआन में एक आयत है, जिसे तुम पढ़ते हो। अगर वह हम यहूदियों पर हमारी किताब तौरात में नाज़िल होती, तो हम उस दिन को ईद का दिन ठहराते, जिसमें हम जश्न मनाते; इस महान आयत के उतरने की नेमत का शुक्र अदा करने के लिए। यह सुन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने उससे पूछा : वह कौनसी आयत है? उसने उत्तर दिया : {मैंने आज तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म को संपूर्ण कर दिया है तथा तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी है, और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म स्वरूप पसंद कर लिया है।} अतः उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा : हम उस दिन और उस स्थान को जानते हैं, जिसमें यह मुबारक आयत उतरी थी। यह ईद के दिन, यानी जुमा के दिन, नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उस समय उतरी थी, जब आप अरफ़ा में खड़े थे और यह दोनों ही दिन मुसलमानों के नज़दीक महान दिन हैं।