देहात से आए हुए एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अनुरोध किया कि उसे एक ज़िक्र सिखा दें, जिसे वह पढ़ा करे। अतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उससे कहा : तुम कहा करो : "لا إله إلا الله وحده لا شريك له" आरंभ एकेश्वरवाद की गवाही से किया। इसका अर्थ यह है कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं है। "الله أكبر كبيرًا" (अल्लाहु अकबर कबीरा) यानी अल्लाह सारी चीज़ों से बड़ा एवं महान है। "والحمد لله كثيرًا" (वल-हम्दु लिल्लाहि कसीरा) यानी अल्लाह की अत्यधिक प्रशंसा है। उसके गुणों एवं कार्यों तथा अनगिनत नेमतों पर। "سبحان الله رب العالمين" (सुबहानल्लाहि रब्बिल आलमीन) यानी अल्लाह कमियों से पाक एवं पवित्र है। "لا حول ولا قوة إلا بالله العزيز الحكيم" (ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम) यानी एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाना अल्लाह, उसके सहयोग और सुयोग के बिना संभव नहीं है। उस व्यक्ति ने कहा : ये शब्द मेरे रब के लिए हैं। यानी उसके ज़िक्र एवं सम्मान के लिए हैं। मुझे खुद अपने लिए माँगना हो, तो किन शब्दों द्वारा माँगूँ? चुनांचे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे कहा : तुम कहो : "اللهم اغفر لي" (अल्लाहुम्मग़्फिरली) ऐ अल्लाह! मेरे गुनाहों को मिटाकर तथा उनपर पर्दा डालकर मुझे क्षमा कर दे। "وارحمني" (वर्हमनी) मेरे धार्मिक एवं सांसारिक हितों की रक्षा करते हुए, मुझपर दया करत। "واهدني" (वहदिनी) मुझे उत्तम परिस्थितियों की राह दिखा और सीधे मार्ग पर चला। "وارزقني" (वर्ज़ुक़नी) मुझे हलाल धन, स्वास्थ्य और हर भलाई एवं सुरक्षा प्रदान कर।