नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास 'उक्ल' और 'उरैना' क़बीलों के कुछ लोग मुसलमान होकर आए। तो उन्हें एक बीमारी और रोग लग गया, जिससे उनके पेट फूल गए। और इसी कारण उन्होंने मदीना में रहना नापसंद किया, क्योंकि वहाँ का खान-पान और आबोहवा उन्हें रास नहीं आई। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको ज़कात के ऊँटों के पास जाकर रहने और उनका पेशाब एवं दूध पीने का आदेश दिया। वे चले भी गए। लेकिन जब स्वस्थ और खूब मोटे-ताज़े हो गए, तो अल्लाह के रसूल की ओर से नियुक्त चरवाहे को मार दिया और ऊँटों को हाँककर चल दिए। इसकी सूचना आपके पास सुबह-सुबह पहुँची, तो उनको ढूँढने के लिए लोग भेज दिए। वे ढूँढ भी लिए गए। दिन चढ़ने के बाद उनको क़ैद करके आपके सामने लाया गया, तो आपने उनके हाथ-पाँव काट डालने और आँखें फोड़ देने का आदेश दिया। क्योंकि चरवाहे के साथ उन्होंने यही किया था। फिर उन्हें हर्रा (लावा) के मैदान में फेंक दिया गया। पानी माँगते रहे, लेकिन पानी नहीं दिया गया, यहाँ तक कि मर गए। अबू क़िलाबा कहते हैं: इन लोगों ने चोरी की थी, क़त्ल किया था, ईमान के बाद कुफ़्र की राह अपनाई थी और अल्लाह एवं उसके रसूल से युद्ध किया था।