अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसलमानों को सात कामों का आदेश दिया है और सात कामों से रोका है। आपने निम्नलिखित सात कामों का आदेश किया है : 1- बीमार व्यक्ति का हाल-चाल जानने के लिए जाना। 2- जनाज़े के पीछे चलना, मय्यित पर नमाज़े जनाज़ा पढ़ने और उसे दफ़न करने में शामिल होना तथा उसके लिए दुआ करना। 3- जब कोई व्यक्ति छींकने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहे (यानी अल्लाह की प्रशंसा करे), तो उसके लिए यरहमुकल्लाह कहना चाहिए (यानी उसके लिए रहमत की दुआ करना चाहिए)। 4- क़सम खाने वाले को अपनी क़सम पर क़ायम रहने में मदद करना। यानी अगर किसी ने कोई काम करने की क़सम खाई और तुम उसे अपनी क़सम पर क़ायम रहने में मदद कर सकते हो, तो मदद ज़रूर करो, ताकि उसे क़सम का प्रायश्चित न करना पड़े। 5- पीड़ित की मदद करना। यानी उसके साथ खड़े होना और उसे जहाँ तक हो सके, अत्याचार से बचाना। 6- कोई निमंत्रण, जैसे वलीमे या अक़ीक़े आदि का निमंत्रण देने वाले का निमंत्रण स्वीकार करना। 7- सलाम करने और सलाम का उत्तर देने का प्रचलन आम करना। आपने जिन कार्यों से मना किया है, वो इस प्रकार हैं : 1- सोने की अंगोठी को पहनना तथा खुद को उससे सजाना। 2- चाँदी के बर्तन में कुछ पीना। 3- घोड़े की काठी तथा ऊँट के कजावे पर रखे हुए रेशम के गद्दे पर बैठना। 4- रेशम मिश्रित सूत से बना हुआ कपड़ा, जिसे अरबी में 'अल-क़सी' कहा जाता है, पहनना। 5- रेशम पहनना। 6- इस्तबरक़ यानी मोटा रेशम पहनना। 7- दीबाज पहनना, यह रेशम का सबसे बढ़िया और सबसे कीमती प्रकार है।