ख़लीफ़ा उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- अपनी सभा में थे और उनके साथ कुछ सहाबा मौजूद थे। इसी बीच उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने उनसे पूछा : आपमें से किसने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है? कुछ सहाबा ने कहा : हमने आपको फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है। यह सुन उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा : शायद तुम बीवी-बच्चों के कारण सामने आने वाली परीक्षा तथा फ़ितना मुराद ले रहे हो। जैसे उनका अत्यधिक प्रेम, उनके हितों की रक्षा की तीव्र इच्छा, उनमें व्यस्तता के कारण बहुत-सी भलाइयों को नज़र अंदाज़ कर देना या उनके अधिकारों को अदा करने, उन्हें संस्कार एवं शिक्षा देने में कोताही करना तथा इसी तरह अपने पड़ोसी आदि का फ़ितना। क्या तुम्हारी मुराद ये फ़ितने हैं? उन्होंने उत्तर दिया : निश्चित रूप से हमारी मुराद यही है। उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा : ये ऐसे फ़ितने हैं, जो आत्मचिंतन का तक़ाज़ा करते हैं। इनमें से कुछ गुनाह ऐसे भी हैं, जिन्हें नेकियों, जैसे नमाज़, रोज़े और सदक़े से मिटा दिए जाने की आशा है। लेकिन यह बताओ कि तुममें से किसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को ऐसे फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है, जो इतने भयावह एवं व्यापक होंगे कि लोगों को समुद्र की लहरों की तरह हिलाकर रख देंगे। उनका प्रश्न सुनकर सब लोग ख़ामोश हो गए, लेकिन हुज़ैफ़ा बिन यमान रज़ियल्लाहु अनहु ने फ़रमाया : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस तरह के फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है। इससे उमर रज़ियल्लाहु अनहु ख़ुश हो गए और फ़रमाया : तेरे पिता के क्या कहने कि उसने तुझ जैसे संतान को जन्म दिया। ज़रा बताओ कि तुमने क्या सुना है? हुज़ैफ़ा ने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : फ़ितने प्रकट होते रहते हैं और मानव हृदय से इस तरह चिपक जाते हैं, जिस तरह चटाई सोने वाले के पहलू में चिपक जाती है। फ़ितनों का इस तरह चिपकना हृदय को प्रभावित करता है। ये फ़ितने एक के बाद होते रहते हैं। ऐसे में फ़ितने जिस हृदय के अंदर प्रवेश कर गए और पानी की तरह अवशोषित हो गए, उसमें एक काला निशान पड़ जाता है और जिस हृदय ने उन्हें ठुकरा दिया, उसमें एक सफ़ेद निशान पड़ जाता है। फलस्वरूप हृदय दो प्रकार के हो जाते हैं : ऐसा हृदय जो ईमान का लिहाज़ रखने, हर प्रकार के दोष से सुरक्षित रहने और फ़ितनों की चपेट में न आने के कारण बिल्कुल सफ़ेद होता है, मानो जैसे एक चिकना पत्थर हो जिसमें कुछ लगा हुआ न हो। ऐसे हृदय को फ़ितने नुक़सान नहीं पहुँचा सकते, यहाँ तक कि अल्लाह से जा मिले। दूसरा ऐसा हृदय कि फ़ितनों के कारण उसका रंग बदलकर काला हो गया हो और वह झुके हुए या उलटे रखे हुए लोटे की तरह हो कि उसमें कुछ टिकता न हो। उसपर न कोई अच्छी बात असर करती हो और न हिकमत अपना प्रभाव छोड़ती हो। वह न सही का समर्थन करे और न ग़लत का खंडन करे। सिवाय उसके जिसे उसकी आत्मा पसंद करे और चाहे। हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु ने उमर रज़ियल्लाहु अनहु से कहा : ये फ़ितने आपके जीवन काल में प्रकट नहीं होंगे। इनके तथा आपके बीच एक बंद द्वार है, जो बहुत जल्द तोड़ दिया जाएगा। उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने पूछा : क्या उसे तोड़ ही दिया जाएगा? क्योंकि अगर खोल दिया जाता तो बंद कर दिए जाने की संभावना रहती। हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु ने उत्तर दिया : उसे खोला नहीं, बल्कि तोड़ दिया जाएगा। और वह द्वार दरअसल एक व्यक्ति है, जिसे मार दिया जाएगा या जो मर जाएगा। एक बात यह भी याद रहे कि मैंने जो सूचना दी है, वह एक सच्ची एवं पुष्ट सूचना है। यह अह्ल-ए-किताब की किताबों से ली हुई सूचना नहीं और न ही किसी राय रखने वाले की अपनी सोच है, बल्कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हदीस है।