अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि इस्रा एवं मेराज की रात आपकी मुलाक़ात अल्लाह के परम मित्र इब्राहीम अलैहिस्सलाम से हुई, तो उन्होंने कहा : ऐ मुहम्मद! अपनी उम्मत को मेरा सलाम कह देना और बता देना कि जन्नत की मिट्टी बहुत अच्छी है और उसका पानी बड़ा मीठा है। खारेपन का नाम व निशान तक नहीं है। जन्नत एक समतल, पेड़-पौधों से ख़ाली और बहुत बड़ा मैदान है, जिसमें पेड़ लगाने का काम कुछ पवित्र शब्दों द्वारा होता है। इन पवित्र शब्दों को "अल-बाक़ियात अल-सालिहात" यानी बाक़ी रह जानी वाली नेकियाँ भी कहा जाता है। ये शब्द हैं : "सुबहानल्लाह, अल-हम्दु लिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह एवं अल्लाहु अकबर", जब जब कोई मुसलमान इन शब्दों को कहता है और दुहराता है, तो उसके लिए जन्नत में पेड़ लगा दिया जाता है।