अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- इस बात की प्रेरणा दे रहे हैं कि एक मुसलमान की मृत्यु अल्लाह से अच्छा गुमान रखते हुए ही होनी चाहिए। मरते वक़्त उम्मीद का पहलू प्रबल होना चाहिए और दिल में यह उम्मीद होनी चाहिए कि अल्लाह उसपर रहम करेगा और उसे माफ़ कर देगा। क्योंकि असल में, डर की ज़रूरत कर्मों को बेहतर बनाने के लिए होती है और वह समय कर्म का होता नहीं है। इसलिए, वहाँ उम्मीद का पहलू प्रबल होना चाहिए।