अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि जिसने शरई दंड वाजिब करने वाला कोई गुनाह, जैसे व्यभिचार और चोरी आदि किया और दुनिया में उसे शरई दंड दे दिया गया, तो यह दंड उसके उस गुनाह को मिटा देता और आख़िरत में मिलने वाली उसकी सज़ा को ख़त्म कर देता है। क्योंकि अल्लाह का न्याय एवं दया इस बात की अनुमति नहीं देती कि बंदे को दो-दो सज़ाएँ दे। इसी तरह जिस बंदे पर अल्लाह ने दुनिया में पर्दा डाल दिया औ उसे उस गुनाह पर सज़ा नहीं दिया तथा उसके गुनाह को माफ़ कर दिया, तो अल्लाह का अनुग्रह इस बात की अनुमति नहीं देता है कि अपने माफ़ किए हुए बंदे को दोबारा सज़ा दे।