अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि नमाज़ में पुरुषों की सबसे उत्तम, अधिक सवाब और फ़ज़ीलत वाली सफ़ पहली सफ़ है। क्योंकि पहली सफ़ में खड़े लोग इमाम के निकट होते हैं, आसानी से उसकी क़िरात सुन सकते हैं और महिलाओं से दूर होते हैं। जबकि पुरुषों की सबसे बुरी, कम सवाब तथा कम फ़ज़ीलत वाली और शरई उद्देश्यों से सबसे दूरी वाली सफ़ अंतिम सफ़ है। इसके विपरीत महिलाओं की सबसे उत्तम सफ़ अंतिम सफ़ है। क्योंकि यहाँ उनका पर्दा अधिक होता है तथा पुरुषों के साथ मेल-जोल, उनको देखने तथा उनके फ़ितने में पड़ने की संभावना सबस कम रहती है। जबकि उनकी सबसे बुरी सफ़ पहली सफ़ है, जो पुरुषों से क़रीब होती है और उसके फ़ितने में पड़ने की संभावना भी रहती है।