अमीर अल-मोमिनीन अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि जब तुम लोग मुझे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की हदीस बयान करते हुए सुनोगे, तो मैं बिलकुल स्पष्ट अंदाज़ में बात करूँगा। न गोल-मोल बात करूँगा, न कुछ कहकर कुछ मुराद लूँगा और न छुपाऊँगा। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हवाले से झूठ बोलने की तुलना में आकाश से गिर जाना मेरे लिए कहीं अधिक आसान और हल्का है। लेकिन जब मैं बात अपने तथा लोगों के बीच की करूँ, तो युद्ध धोखा है, अतः मैं गोल-मोल बात करूँगा, और कुछ कहकर कुछ और मुराद लूँगा। तथा मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : आख़िरी ज़माने में कुछ कम उम्र तथा कम अक़्ल नौजवान पैदा हो जाएँगे, जो क़ुरान बहुत ज़्यादा पढ़ेंगे और उसके हवाले से बात करेंगे। वे इस्लाम और उसकी सीमा से उसी प्रकार निकल जाएँगे, जिस प्रकार तीर शिकार से निकल जाता है। उनका ईमान उनके गले से नीचे नहीं जाएगा। ये लोग जहाँ मिल जाएँ, उनका क़त्ल कर दो। क्योंकि क़यामत के दिन इनका क़त्ल करना क़त्ल करने वाले के लिए सवाब का कारण होगा।