अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो दुआएँ किया करते थे, उनमें से एक यह है : "اللهم لك أسلمت" यानी ऐ अल्लाह! मैं तेरा आज्ञाकारी बन गया, "وبك آمنت" तुझपर ईमान लाया, तेरी पुष्टि की और तेरे प्रति अपनी स्वीकारोक्ति व्यक्त की, "وعليك توكلت" तुझपर भरोसा किया और अपने सारे मामलात तेरे हवाले कर दिए, "وإليك أنبت" तेरी ओर लौट आया, "وبك خاصمت" तथा तेरी मदद से तेरे दुश्मनों से वाद-विवाद किया। "اللهم إني أعوذ بعزتك" ऐ अल्लाह! मैं तेरे सम्मान, शक्ति और प्रभुत्व के शरण में आता हूँ, "لا إله إلا أنت" कि तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, "أن تضلني" इस बात से कि तू मुझे सत्य एवं अपनी प्रसन्नता के मार्ग से हटा दे। "أنت الحي الذي لا يموت" तू ही सदा जीवित रहने वाली हस्ती है, जिसे कभी मौत नहीं आ सकती और जो कभी फ़ना नहीं हो सकती। "والجن والإنس يموتون" जबकि जिन्नों एवं इन्सानों को मर जाना है।