साद बिन अबू वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अनहु ने सोच रखा था कि चूँकि वह एक बहादुर इन्सान हैं, इसलिए उन्हें दूसरे कमज़ोर लोगों पर उत्कृष्टता प्राप्त है। अतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : तुम्हें जो सहायता एवं रोज़ी मिलती है, वह तुम्हारे अंदर मौजूद कमज़र लोगों की दुआओं, नमाज़ों एवं अल्लाह के प्रति निष्ठा के कारण मिलती है। क्योंकि कमजोर लोगों के हृदय संसार की चमक-दमक में उलझे नहीं होते, इसीलिए उनकी दुआओं में आम तौर पर अधिक सच्चाई और उनकी इबादतों में अधिक विनम्रता होती है।