मुस्अब बिन साद कहते हैं : साद -रज़ियल्लाहु अनहु- के मन में आया कि उन्हें अपने से कमतर लोगों पर कुछ श्रेष्ठता प्राप्त है। अतः नबी सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम्हारे कमज़ोर लोगों के कारण ही तुम्हारी सहायता की जाती है और तुम्हें रोज़ी दी जाती है।" स़ह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
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व्याख्या

साद बिन अबू वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अनहु ने सोच रखा था कि चूँकि वह एक बहादुर इन्सान हैं, इसलिए उन्हें दूसरे कमज़ोर लोगों पर उत्कृष्टता प्राप्त है। अतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : तुम्हें जो सहायता एवं रोज़ी मिलती है, वह तुम्हारे अंदर मौजूद कमज़र लोगों की दुआओं, नमाज़ों एवं अल्लाह के प्रति निष्ठा के कारण मिलती है। क्योंकि कमजोर लोगों के हृदय संसार की चमक-दमक में उलझे नहीं होते, इसीलिए उनकी दुआओं में आम तौर पर अधिक सच्चाई और उनकी इबादतों में अधिक विनम्रता होती है।

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हदीस का संदेश

  • विनम्र रहने तथा अभिमान से बचने की प्रेरणा।
  • इब्न-ए-हजर कहते हैं : बलवान व्यक्ति जहाँ अपनी वीरता के मामले में श्रेष्ठ होता है, वहीं कमज़ोर व्यक्ति अपनी दुआ और अल्लाह के प्रति निष्ठा के मामले में श्रेष्ठ होता है।
  • निर्धनों के साथ अच्छा व्यवहार करने और उन्हें उनके अधिकार देने की प्रेरणा। क्योंकि इससे अल्लाह की दया एवं सहायता मिलती है।