अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सावधानी के तौर पर रमज़ान के एक या दो दिन पहले से रोज़ा शुरू कर देने से मना किया है। इसका कारण यह है कि रमज़ान के रोज़े की अनिवार्यता चाँद देखने से जुड़ी हुई है और तकल्लुफ़ की कोई आवश्यकता नहीं है। अलबत्ता अगर किसी ने पहले से रोज़ा रखने का कोई मामूल बना रखा हो, जैसे एक दिन रोज़ा रखना और एक दिन नाग़ा करना, या फिर सोमवार या बृहस्पतिवार के रोज़े रखना और मामूल का दिन रमज़ान से एक-दो दिन पहले पड़ जाए, तो वह उस दिन रोज़ा रख सकता है। क्योंकि यह रमज़ान का स्वागत नहीं है। इसी तरह, वाजिब रोज़े जैसे- क़ज़ा एवं मन्नत के रोज़े भी रमज़ान से एक-दो दिन पहले रखे जा सकते हैं।