नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत यह है कि जब आप फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर सूरज के बुलंद होने तक बैठे रहते थे। आप अपनी उस नमाज़ की जगह से, जहाँ आप फ़ज्र की नमाज़ पढ़ते थे, सूरज निकलने तक नहीं उठते थे। फिर जब सूरज निकल आता, तो खड़े हो जाते। सहाबा बात करते हुए इस्लाम से पहले के अपने कुछ मामलों का ज़िक्र करने लगते, तो आप ख़ामोश रहते। जब वे हँसते तो कभी-कभी आप भी उनके साथ मुस्कुरा देते।