इस हदीस में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस बात की ताकीद की है कि अगर सफ़ों को बराबर नहीं किया गया, तो अल्लाह उन लोगों के मतो में विभेद डाल देगा, जिनकी सफ़ें टेढ़ी रह गईं और उनको सीधी करने पर ध्यान नहीं दिया। अतः, सफ़ में कोई आगे रहा तो कोई पीछे और नमाज़ियों के बीच में खाली स्थान भी छोड़ दिए। प्यारे रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जहाँ अपने साथियों को बताकर सिखाते थे, वहीं अमली तौर पर भी उन्हें प्रशिक्षण देते थे। चुनांचे आप हर नमाज़ के समय उनकी सफ़ें खुद अपने हाथों से सीधी करते रहे, यहाँ तक कि जब आपको लगा कि वे अच्छी तरह से समझ गए हैं, तो इस सिलसिले को बंद कर दिया। फिर एक दिन नमाज़ के समय अपने एक साथी को देखा कि उनका सीना सफ़ से बाहर निकला हुआ है, तो नाराज़ हुए और कहाः "तुम अपनी सफ़ें ज़रूर सीधी रखो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे मतों में विभेद पैदा कर देगा।"