अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने साथियों के साथ एक निमंत्रण में शरीक हुए। वहाँ आपके साथ बकरी का बाज़ू रखा गया। क्योंकि आपको बकरी के बाज़ू का मांस बहुत पसंद था। चुनांचे आपने अपने दाँत से एक बार उसे काटकर खाया और उसके बाद फ़रमाया : मैं क़यामत के दिन आदम की संतानों का सरदार रहूँगा। आपने यह बात अल्लाह के अनुग्रह का आभार व्यक्त करने के लिए कही। उसके बाद पूछा : क्या तुम जानते हो कि यह कैसे होगा? फ़रमाया : क़यामत के दिन सभी लोग एक विशाल, सपाट भूमि पर एकत्र किए जाएँगे। लोग इस तरह एकत्र होंगे कि एक पुकारने वाला सब को अपनी आवाज़ सुना सकेगा। अर्थात्, कोई बात करे, तो सब तक आवाज़ पहुँच जाएगी। भूमि इतनी सपाट होगी कि एक देखने वाला सब को देख सकेगा। कोई उसकी नज़र से छुपा नहीं रहेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो कोई ऐसी वस्तु नहीं होगी, जो किसी को देखने वालों की नज़रों से छुपा सके। सूरज (का हाल यह होगा कि) सृष्टियों से एक मील निकट आ जाएगा। चुनांचे लोगों को असहनीय कष्ट एवं पीड़ा का सामना होगा। अतः सिफ़ारिश द्वारा उससे छुटकारा पाना चाहेंगे। ऐसे में अल्लाह ईमान वालों के दिलों में यह बात डालेगा कि वे मानव पिता आदम अलैहिस्सलाम के पास जाएँ। चुनांचे लोग उनके पास जाएँगे और उनकी फ़ज़ीलत बयान करेंगे, ताकि वह अल्लाह के यहाँ उनके लिए सिफ़ारिश कर दें। लोग उनसे कहेंगे : आप मानव पिता हैं। अल्लाह ने आपको अपने हाथ से पैदा किया है, अपने फ़रिश्तों से सजदा कराया है, हर वस्तु का नाम सिखाया है और आपके अंदर अपनी ओर से रूह फूँकी है। लेकिन वह असमर्थता व्यक्त कर देंगे और कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी इतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। फिर वह उनसे होने वाले गुनाह का ज़िक्र करेंगे। गुनाह यह था कि अल्लाह ने उन्हें एक पेड़ के फल को खाने से मना किया था, लेकिन उन्होंने खा लिया था। वह कहेंगे : ख़ुद मुझे ही सिफ़ारिश की आवश्यकता है। तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम नूह अलैहिस्सलाम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग नूह अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप इस धरा पर बसने वालों की ओर अल्लाह के भेजे हुए पहले रसूल हैं। अल्लाह ने आपको आभारी बंदे का नाम दिया है। लेकिन वह भी असमर्थता व्यक्त कर देंगे और कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी इतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। दरअसल उन्हें एक दुआ करने का अधिकार दिया गया था, जो उन्होंने ख़ुद अपनी जाति के विरुद्ध कर डाली थी। अतः ख़ुद उन्हें ही सिफ़ारिश की ज़रूरत है। वह कहेंगे कि तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप इस धरा पर अल्लाह के मित्र हैं। अतः अपने पालनहार के यहाँ हमारी सिफ़ारिश कर दें। क्या आप देखते नहीं कि हम किस हाल में हैं? लेकिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम उनसे कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी उतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। दरअसल मैंने तीन झूठ बोले थे। तीन झूठ से उनकी मुराद एक बार 'मैं बीमार हूँ कहना', एक बार 'यह काम उनमें से सबसे बड़े बुत ने किया है' कहना और एक बार शासक के फ़ितने से बचने के लिए अपनी पत्नी सारा से यह कहना है कि उसे बता देना कि मैं तुम्हारा भाई हूँ। सच्चाई यह है कि ये तीनों वाक्य सांकेतिक शब्दों में बात करने की श्रेणी में आते हैं, लेकिन चूँकि वे देखने में झूठ जैसे लगते थे, इसलिए उन्होंने उनके डर से ख़ुद को सिफ़ारिश करने के योग्य नहीं समझा। क्योंकि जो अल्लाह के बारे में ज्ञान और उसकी निकटता अधिक रखता है, वह उससे डरता भी ज़्यादा है। वह कह देंगे कि मुझे ख़ुद ही सिफ़ारिश की ज़रूरत है, इसलिए तुम किसी और के पास जाओ। तुम मूसा अलैहिस्सलाम के पास जाओ। चुनांचे लोग मूसा अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : ऐ मूसा! आप अल्लाह के रसूल हैं। अल्लाह ने आपको रसूल बनाने के साथ बात करने का भी सम्मान प्रदान किया है। अतः आप अपने पालनहार के पास हमारे लिए सिफ़ारिश कर दें। क्या आप देखते नहीं कि हम किस अवस्था में हैं? लेकिन वह कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी उतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। दरअसल मैंने एक व्यक्ति को मार डाला था, जिसे मारने का आदेश मुझे प्राप्त नहीं था। ख़ुद मुझे ही किसी की सिफ़ारिश की ज़रूरत है। तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम ईसा बिन मरयम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग ईसा अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप अल्लाह के रसूल हैं, उसका शब्द हैं, जिसे उसने मरयम की ओर भेजा था और उसकी ओर से प्रेषित आत्मा हैं। आपने माँ की गोद ही में लोगों से बात की थी। क्या आप नहीं देखते कि हम किस अवस्था में हैं? लेकिन वह कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी उतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। वह किसी गुनाह का उल्लेख नहीं करेंगे। अलबत्ता कहेंगे कि ख़ुद मुझे ही किसी की सिफ़ारिश की ज़रूरत है। तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप अल्लाह के रसूल और अंतिम नबी हैं। अल्लाह ने आपके अगले तथा पिछले सभी गुनाह माफ़ कर दिए हैं। इसलिए अपने पालनहार के निकट हमारी सिफ़ारिश कर दीजिए। क्या आप देखते नहीं कि हम किस अवस्था में हैं? चुनांचे मैं चल पड़ूँगा, अर्श के नीचे पहुँचूँगा और अपने पालनहार के सामने सजदे में गिर जाऊँगा। फिर अल्लाह मुझे अपनी प्रशंसा एवं स्तुति के ऐसे-ऐसे शब्द सिखाएगा, जो मुझसे पहले किसी को नहीं सिखाए गए थे। फिर कहा जाएगा : ऐ मुहम्मद! आप सर उठाएँ। आप माँगें, आपको दिया जाएगा। आप सिफ़ारिश करें, आपकी सिफ़ारिश क़बूल की जाएगी। चुनांचे मैं सर उठाऊँगा और कहूँगा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी उम्मत! ऐ मेरे पालनहार! मेरी उम्मत! ऐ मेरे पालनहार! मेरी उम्मत! चुनांचे आपकी सिफ़ारिश क़बूल कर ली जाएगी। तथा आपसे कहा जाएगा : ऐ मुहम्मद! आप अपनी उम्मत के ऐसे लोगों को जन्नत के दाएँ द्वार से अंदर दाख़िल करें, जिन्हें हिसाब नहीं देना है। जबकि वे दूसरे द्वारों से भी लोगों के साथ अंदर जा सकते हैं। फिर आपने कहा : उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जन्नत के दो किवाड़ों के बीच उतना फ़ासला है, जितना मक्का तथा यमन के सनआ के बीच है या जितना मक्का और शाम के बुसरा यानी हूरान नगर के बीच है।