जब उच्च एवं महान अल्लाह ने अपने नबी को हुनैन युद्ध में विजय दिलाई, बहुत-सा माल-ए-ग़नीमत दिया और आप ताइफ़ का मुहासरा छोड़ने के बाद माल-ए-ग़नीमत के पास आए तथा ऐसे लोगों को उसमें से दिया, जो नए-नए मुसलमान हुए थे, ताकि उन्हें क़रीब लाया जा सके, तो कुछ अंसार ने इसपर आपत्ति जताई। जबकि बड़े अंसारी सहाबा को पता था कि आपने जो कुछ किया है, सही किया है। जब आपको उनकी इस आपत्ति की सूचना मिली, जैसा कि किसी ने यह भी कह दिया था कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) माल-ए-ग़नीमत हमें छोड़कर ऐसे लोगों को दे रहे हैं, जिनका ख़ून हमारी तलवारों से अभी भी टपक रहा है! तो आपने उन्हें एक चबूतरे में जमा होने का आदेश दिया। जब सब लोग एकत्र हो गए, तो आपने यहाँ से बात शुरू की कि यह कैसी बात है, जो तुम्हारे बारे में मुझ तक पहुँच रही है? फिर वह सारी बातें कहीं, जिसका ज़िक्र इस हदीस में है। आपने अपने संबोधन में उन्हें फटकारने के साथ-साथ उनके उस सहयोग की खूब सराहना की, जो उनकी ओर से आपको और आपके लाए हुए धर्म इसलाम को दिया गया था। ज़़ाहिर है, इससे वे प्रसन्न हो गए और अच्छी तरह जान गए कि अल्लाह ने अपने रसूल की संगित और आपको अपने साथ अपने घर ले जाने के सौभाग्य के रूप में उन्हें कितनी बड़ी नेमत प्रदान की है और साथ ही उनकी इन सेवाओं और क़ुरबानियों के बदले में आख़िरत में उनके लिए क्या कुछ तैयार कर रखा है। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आने वाले दिनों में उन्हें जिस भेदभाव का सामना करना है, उसपर सब्र से काम लेने का आदेश दिया।