अबू सई ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति को देखा कि वह पूरी रात सूरा "क़ुल हुवल्लाहु अहद" पढ़े जा रहा है। इससे आगे कुछ नहीं पढ़ता। सुबह हुई, तो वह अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास पहुँचा और इसके बारे में बताया। गोया सवाल करने वाला इसे थोड़ा समझ रहा था। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए क़सम खाते हुए फ़रमाया : उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क़ुरान के बराबर है।