उम्मुल मोमिनीन (मोमिनों की माता) हफ़्सा रज़ियल्लाहु अन्हा से पूछा गया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम क़ुरआन की क़िरात किस तरह करते थे? उन्होंने उत्तर दिया : तुम लोग ऐसा नहीं कर सकते, तो लोगों ने उनसे कहा : हमें बताइए तो सही। नाफ़े कहते हैं कि इब्ने अबी मुलैका ने हमें ठहर-ठहर कर सुनाया, ताकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ुरआन पाठ का तरीक़ा बता और उसे समझा सकें। चुनांचे उन्होंने {الحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ} 'अलह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन' पढ़ा, फिर रुक गए, फिर {الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ} 'अर-रह़मानिर-रह़ीम' पढ़ा, फिर रुक गए और फिर {مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ} 'मालिकि यौमिद्दीन' पढ़ा।