चूँकि जुमा का दिन मुसलमानों के लिए ईद का दिन है, इसलिए नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उस दिन विशेष रूप से रोज़ा रखने अथवा नमाज़ पढ़ने से मना फ़रमाया है। हाँ, यदि उससे पहले अथवा उसके बाद एक दिन रख लिया जाए या किसी के मामूल के रोज़ों में जुमे का दिन आ जाए, तो कोई हर्ज नहीं है। इससे मना इसलिए किया गया है, ताकि जनसाधारण में यह संदेश न जाए कि उस दिन अन्य दिनों के मुक़ाबले में अधिक इबादत करना वाजिब है।