अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कोई प्रशासनिक पद माँगकर लेने से मना फ़रमाया है, इसलिए कि यदि किसी को माँगने के कारण पद मिलता है, तो उसकी सहायता नहीं की जाती और उसे असहाय छोड़ दिया जाता है, क्योंकि वह दुनिया चाहता है और उसे आखिरत पर तरजीह देता है। जबकि जो बिना माँगे पद प्राप्त करता है, अल्लाह उसे संभालने के संबंध में उसकी सहायता करता है। इस हदीस में यह भी बताया गया है कि क़सम किसी अच्छे कार्य से रोक नहीं सकती। यदि क़सम खाने वालेे को लगे कि भलाई क़सम को तोड़नेे ही में है, तो उसके लिए जायज़ है कि कफ़्फ़ारा देकर क़सम से छुटकारा प्राप्त कर ले और वह कार्य करे, जो अच्छा है।