नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दुआ करते हुए फ़रमाया: "ऐ अल्लाह, मैं भी एक इंसान हूँ, मैं भी उसी तरह क्रोधित होता हूँ, जैसे आम इंसान होते हैं। तो जिस किसी मोमिन को मैंने तकलीफ़ दी हो, या उसे बुरा-भला कहा हो, या उस पर लानत भेजी हो और उसे तेरी रहमत से दूर होने की बद-दुआ (अभिशाप) दी हो, या उसे कोड़े मारे हों या पीटा हो, तो तू उसे उसके लिए शुद्धि, (अपनी) निकटता, पवित्रता, (पापों का) प्रायश्चित और रह़मत बना दे, जिसके द्वारा तू उस पर रह़म करे।