इबराहीम नख़ई कहते हैं कि जब हम छोटे थे तो लोग गवाही और वचन देने पर हमारी पिटाई करते थे। सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।