चूँकि सोने को सोने के बदले और चाँदी को चाँदी के बदले कमी-बेशी के साथ बेचना सूद है, इसलिए आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इससे मना फ़रमाया है। हाँ, यदि दोनों बराबर हों, तो कोई बात नहीं है। रही बात सोने को चाँदी के बदले या चाँदी को सोने के बदले बेचने की, तो इसमें कोई हर्ज नहीं है, यद्यपि कमी-बेशी के साथ हो। अलबत्ता, इस मामले के सही होने के लिए अनिवार्य है कि जिस बैठक में मामला तय हुआ है, उसी बैठक में दोनों ओर से क़ब्ज़ा भी हो जाए। वरना, यह उधार का सूद क़रार पाएगा, जो कि हराम है। क्योंकि जब जिंस अलग-अलग हो, तो कमी-बेशी जायज़ होगी और क़ब्ज़े की शर्त बाक़ी रहेगी। क्योंकि दोनों के अंदर सूद का सबब एक है।