इस हदीस में किसी भी जानदार के चेहरे पर दागने और इसी तरह चेहरे पर मारने से बड़ी सख़्ती से मना किया गया है। उलेमा ने इसे महा पापों में शुमार किया है। उलेमा ने मनाही का कारण यह बताया है कि चेहरा कोमल तथा सारी सुंदरता का केंद्र हुआ करता है। इसी तरह चेहरे के अंग श्रेष्ठ एवं नाज़ुक होते हैं और इन्सान की अधिकतर अनुभूति इन्हीं पर निर्भर है। जबकि चेहरे पर मारने से यह शक्ति कभी तो नष्ट हो जाती है और कभी घट जाती है। कभी-कभी तो इससे चेहरे कुरूप भी हो जाता है। इसी तरह चेहरा हमेशा सामने होता है और उसे छुपाया नहीं जा सकता, जिसकी वजह से उसका ऐब बड़ा खराब लगता है और उसपर मारने से आम तौर पर ऐब पैदा हो ही जाता है।