अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "उसे देखो, जो तुमसे नीचे है तथा उसे न देखो, जो तुमसे ऊपर है। क्योंकि इससे इस बात की संभावना कम हो जाती है कि तुम अल्लाह की नेमतों का अनादर करो।" स़ह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
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व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने आदेश दिया है कि सांसारिक मामलों, जैसे पद, धन तथा यश आदि में, अपने से कमतर लोगों की ओर देखना चाहिए और श्रेष्ठ लोगों की ओर देखने से मना किया है। क्योंकि इन मामलों में श्रेष्ठ लोगों की ओर देखने से संभव है कि व्यक्ति अल्लाह की नेमतों को कम समझने लगे।

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हदीस का संदेश

  • संतुष्टि मोमिन की एक बहुत बड़ी विशेषता है, जो अल्लाह की लिखी तक़दीर से मुत्मइन होने की निशानी है।
  • इब्न-ए-जरीर कहते हैं : इस हदीस में कई अच्छी बातें कही गई हैं। क्योंकि जब कोई व्यक्ति सांसारिक दृष्टि से अपने से श्रेष्ठ लोगों को देखता रहता है, तो उसके मन में ऐसी नेमतों की लालसा उत्पन्न हो जाती है, और उसकी आत्मा अल्लाह की उन नेमतों को कम आँकने लगती है जो उसे प्राप्त हैं। ऐसे में वह अधिक से अधिक दुनिया प्राप्त करना चाहता है, ताकि उनके साथ या उनके पास खड़ा हो सके। यही बात अधिकतर लोगों के अंदर पाई जाती है। लेकिन जब वह इसके विपरीत सांसारिक दृष्टि से अपने से कमतर लोगों को देखता है, तो उसे अपने पास मौजूद नेमतों का महत्व समझ में आता है। अतः उनका शुक्र अदा करता है, विनम्र रहता है और उनका उपयोग अच्छे कामों में करता है।