अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने साथियों को रास्तों में बैठने से सावधान किया, तो उन्होंने कहा कि हमें रास्तों में बैठना ही पड़ता है। इसपर आपने कहा : यदि तुम न मानो और तुम्हें रास्तों में बैठना ही पड़े, तो रास्ते का हक़ अदा करना ज़रूरी है। सहाबा ने रास्ते के हक़ के बारे में पूछा, तो बताया कि सामने से जो स्त्रियाँ गुज़रें उन्हें ताकने की बजाय नज़र नीची रखो, गुज़रने वाली स्त्रियों को अपनी बात अथवा कर्म द्वारा कष्ट देने से बचो, जो सलाम करे उसका उत्तर दो, भलाई का आदेश दो और जब कोई गलत काम होता हुआ देखो, तो उसका खंडन करो।