इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़बान की विनाशता एवं विध्वंसता से सावधान करते हुए बताया है कि एक व्यक्ति ने क़सम खाकर कहा कि अल्लाह अमुक पापी व्यक्ति को क्षमा नहीं करेगा। दरअसल, उसके दिल में यह बात बैठी हुई थी कि अल्लाह के निकट उसे एक विशेष स्थान प्राप्त है और इस पापी की कोई हैसियत नहीं है। इसलिए, एक तरह से उसने अल्लाह के चारों ओर अपने आदेश का घेरा डाल दिया और उसे अपनी बात का पाबंद बनाने का प्रयास किया। चूँकि यह अल्लाह को राह दिखाने का प्रयास और उसके साथ अशिष्टता थी, इसलिए अल्लाह ने उस आदमी के हक़ में दुनिया एवं आखिरत की नाकामी और नामुरादी लिख दी।