ज़ैद बिन हारिसा (रज़ियल्लाहु अंहु) गोरे थे और उनके बेटे उसामा (रज़ियल्लाहु अंहु) साँवले रंग के। (इसी रंग में अंतर के कारण) लोग उन दोनों के बारे में संदेह जताते और उसामा की निसबत उनके पिता की ओर सही होने के बारे में एतराज़ जताते, जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कष्ट देता था। एक दिन दोनों एक चादर से सर ढाँपकर सो रहे थे और उनके पाँव खुले हुए थे कि वहाँ से मुजज़्ज़िज़ मुदलिजी नामी क़ियाफ़ा शनास (सामुद्रिक) गुज़रा और उनके क़दमों के बीच समानताओं को देखकर बोलाः यह क़दम एक-दूसरे से संबंध रखते हैं। क़याफ़ा शनास ने यह बात अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने कही थी, इसलिए आप इससे अत्यधिक प्रसन्न हुए। आप आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) के पास गए, तो इस ख़ुशी से आपका चेहरा दमक रहा था कि उसामा (रज़ियल्लाहु अंहु) की निसबत उनके पिता की ओर सही साबित हो रही थी और उन लोगों की बात ग़लत सिद्ध हो रही थी, जो बिना किसी आधार के लोगों की इज़्ज़त-आबरू पर हमला करते हैं।