इस हदीस में अल्लाह की ओर से तीन चीज़ों की ज़मानत है, उस के लिए जो निष्ठापूर्ण ईमान के साथ अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए निकला हो। यदि शहीद हो जाए, तो जन्नत में प्रवेश करेगा। यदि जीवित रहा, तो नेकी अथवा माले गनीमत के संग वापस होगा, अर्थात बिना गनीमत सिर्फ़ नेकी के साथ या नेकी और गनीमत दोनों के साथ। जहाँ तक दूसरी रिवायत की बात है, जिसे उम्दा के लेखक ने मुस्लिम की तरफ़ मंसूब किया है, हालाँकि वह बुखारी में भी है, उस में है कि अल्लाह के रास्ते में जिहाद की श्रेष्ठता उस व्यक्ति की तरह है, जो मस्जिद में दाखिल होकर सदा नमाज़ पढ़ता रहता हो, अथवा रोज़ेदार जो हमेशा रोज़ा रखता हो, और ऐसा करना मनुष्य के बस से बाहर है।