अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर सत्तर अंसारियों को भेजा, जिन्हें 'अल-क़ुर्रा' (क़ुरआन पढ़ने वाले) कहा जाता था। उनमें मेरे मामा ह़राम भी शामिल थे। वे क़ुरआन पढ़ते, रात को सामूहिक रूप से उसके अर्थ के बारे में चर्चा करके सीखते और दिन में पानी लाकर मस्जिद में रखते, लकड़ी चुनकर बेचते और उससे सुफ़्फ़ा (चबूतरा) वालों और निर्धनों के लिए भोजन खरीद कर लाते थे। अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इन क़ारियों को उनके साथ भेज तो दिया, परन्तु उन्होंने निर्धारित स्थान तक पहुँचने से पहले ही उनपर आक्रमण करके उन्हें मार डाला। ऐसे में, उन्होंने कहाः ऐ अल्लाह, हमारी ओर से अपने नबी को यह संदेश पहुँचा देना कि हम तुझसे आ मिले हैं तथा हम तुझसे प्रसन्न हैं और तू हमसे प्रसन्न है। इसी क्रम में एक व्यक्ति ने अनस के मामा हराम के पास पीछे से आकर नेज़ा मारा, जो उनके शरीर में धँस गया और आर-पार हो गया तो हराम ने कहाः काबे के रब की क़सम, मैं सफल हो गया। अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "तुम्हारे भाई क़त्ल कर दिए गए हैं और उन्होंने कहा हैः ऐ अल्लाह, हमारी ओर से अपने नबी को यह संदेश पहुँचा देना कि हम तुझसे आ मिले हैं तथा हम तुझसे प्रसन्न हैं और तू हमसे प्रसन्न है।" सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
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व्याख्या

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