अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि मैंने उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) को जब भी किसी चीज़ के बारे में 'मैं समझता हूँ कि यह ऐसी है' कहते सुना, तो वह वैसी ही निकली। सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।