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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "मैंने जाफ़र को देखा कि जन्नत मैं फ़रिश्तों के साथ उड़ रहे हैं।
सह़ीह़ - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।
ऐ अमीरुल मोमेनीन, अल्लाह तआला ने अपने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा हैः "خذ العفو وأمر بالعرف وأعرض عن الجاهلين" (अर्थात्, क्षमा करते रहें, भली बात का आदेश दें और अज्ञानियों से मुँह फेर लें।) और यह अज्ञानियों में हैं।...
उसके पास जाओ और उसे बता दो कि वह जहन्नमी नहीं, बल्कि जन्नती है।
तुम अल्लाह से डरते रहना और अपने शासकों के आदेश सुनना तथा मानना। चाहे शासक एक हबशी ग़ुलाम ही क्यों न हो। तुम मेरे बाद बहुत ज़्यादा मतभेद देखोगे। अतः तुम मेरी सुन्नत तथा नेक और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण की सुन्नत पर चलते रहना।...
ऐ उमर! शैतान तुम से डरता है, मैं बैठा था, तो यह दफ़ बजाती रही, अबू बक्र आए तो बजाती रही, अली आए तो बजाती रही, उसमान आए तो भी बजाती रही, लेकिन ऐ उमर! जब तुम आए तो इसने दफ़ फेंक दिया...