यहाँ अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- बता रहे हैं कि यह विशाल सात आकाश तथा भारी-भरकम सात धरतियाँ रहमान की हथेली की तुलना में ऐसी हैं, जैसे हममें से किसी की हथेली में राई का छोटा-सा दाना हो। यहाँ अल्लाह की हथेली को इनसान की हथेली के समान क़रार नहीं दिया गया है, बल्कि दोनों उदाहरणों में जो व्यापक अंतर है, उसे समझाया गया है, क्योंकि जैसे अल्लाह की हस्ती के समान कोई वस्तु नहीं है, उसी तरह उसकी विशेषताओं के समान भी किसी की विशेषताएँ नहीं हैं।